शिव काँवड़ (SHIV KAWAD)
जब Devtaऔर Asur समुद्र मंथन कर रहे थे तो सबसे पहले हलाहल विष समुद्र से प्रकट हुआ जिसकी गर्मी से देवता, दैत्य एवं सारा जगत व्याकुल होने लगा।
Vish की गरमी को Shantकरने के लिये Bhagawan Shiv तीनों लोकों में घूमने लगे और उनके मुख से बम-बम निकलने लगा। तब Devtao ने उस Garmi को Shant करने के लिये Bhagawan Shiv के मस्तक पर बहुत सारा Jal चढ़ाया और बाद में Ganga Ji की स्थापना Bhagawan Shiv के Jata में की गयी। उसी समय से Bhagawan Shiv पर जल चढ़ाने की परम्परा चल पड़ी। बाद में शिवभक्त पतित पावनी गनगाजी का जल काँवड़ में भरकर पैदल Bhagawan Shiv पर चढ़ाने लगे और यह परम्परा चल पड़ी।
Bhagawan Shiv पद-यात्रा द्वारा काँवड़ में लाये Gangajal के अभिषेक से अति प्रसन्न होते हैं। Bhagawan Shiv भक्त Kawad मे गंगाजल ले कर Bhagawan Shiv का अभिषेक करते हैं और सारे रास्ते “BOL BAM, BOL BAM” का उच्चारण करते हैं।
मुखरूप से दो स्थानों का विशेष महत्व है :- (1.GOMUKH TO HARIDWAR 2. DEVGHAR (BAIDYANATH DHAM)
गोमुख व Haridwar–
गोमुख ,Gangaji का उद्गम स्थल, व हरिद्वार (हर की पौड़ी) से करोड़ों शिवभक्त Kawad में Gangajal भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने –अपने प्रांतों में आते हैं और गंगाजल से शिवजी के मंदिर में अभिषेक करते हैं।
झारखण्ड के जे. सी.डी. रैलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर DEV GHAR हैं, जहाँ Bhagawan Shiv के 12 ज्योतिर्लिंगों(JOYTIRLING) में से एक ज्योतिर्लिंग के रूप में बैद्यनाथ धाम है। Swan के Mahine में यहाँ पर Shivbhakt काँवड़ चढ़ाते हैं। यहाँ पर सुल्तानगंज से Shivbhakt गंगाजल भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बैद्यनाथ धाम पहुँचकर Shiv Ji का अभिषेक करते हैं। Kawad में दो कलश या डब्बा Gangajal से भरा होता है। एक का जल बाबा बैद्यनाथ पर चढ़ाते हैं और दूसरे का देवघर से 44 किलोमीटर दूर बाबा बासुकीनाथ पर चढ़ाते हैं ।
कुछ Shiv Bhakt 24 घंटों के अंदर हीं यह दूरी तय करते हैं , वे बिना विश्राम के Kawad उठाने के बाद शिव जी के अभिषेक के बाद हीं रुकते हैं । ऐसे शिव भक्तों को DAK BAM कहते हैं।

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