Ganesh ji ki aarti in hindi lyrics

 गणेश जी की आरती - Ganesh ji ki aarti in hindi lyrics


हम सब जानते है की हर भगवान् को प्रसन्न करने के लिए अलग अलग आरती है जिनका समरण करने से प्रभु जल्दी ख़ुश हो जाते है उसी प्रकार  श्री गणेश को भी शीघ्र  प्रसन्न करने के लिए हिंदू पौराणिक कथाओं में पारंपरिक और लोकप्रिय श्री गणेश आरती है। 


हर गणेश गणेश पूजा और गणेश चतुर्थी मे गणेश आरती का पाठ बहुत ख़ास है और माना जाता है की अगर श्री गणेश की आरती का पाठ करते ही हमारे कष्टो का निवारण हो जाता है। 


कहते है किसी भी काम का शुभारंभ करने से पहले हमें श्री गणेश आरती का पाठ अवश्य करना चाहिए ताकि श्री गणेश का हम पर आशीर्वाद रहे और उस काम मे कभी अड़चन न आये।  

इन पवित्र आरती जैसे शिव आरती, हनुमान भजन, कृष्ण आरती और भी बहुत कुछ हमारे दिल की आत्मा को प्रबुद्ध करता है।





गणेश जी की आरती (Ganesh Aarti in Hindi)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय…

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय…


Ganesh Aarti Lyrics in English

Jay Ganesh, Jay Ganesh, Jay Ganesh Devaa |

Maataa Jaakii Paarvatii, Pitaa Mahaadevaa ||

Ek Dant Dayaavant, Caar Bhujaadhaarii |
Maathe Par Tilak Sohe, Muuse Kii Savaarii ||

Paan Caddhe, Phuul Caddhe Aur Caddhe Mewa |
Ladduan Ko Bhog Lage, Sant Kare Sevaa ||

Andhe Ko Aankh Det, Koddhin Ko Kaayaa |
Baanjhan Ko Putra Det, Nirdhan Ko Maayaa ||

Suurashyaam Shaarann Aae Saphal Kiije Sevaa |
Maataa Jaakii Paarvatii, Pitaa Mahaadevaa ||

Jay Ganesh, Jay Ganesh, Jay Ganesh Devaa ||


कैसे करें भगवान गणेश की आरती - How to Perform Aarti of Lord Ganesh

किसी भी देवता को प्रसन्न करने के लिए सबसे जरुरी है की हम उनकी आरती का विधिपूर्वक पाठ करे। हमने घर पर गणेश आरती करने का सबसे अच्छा तरीका साझा किया है ताकि गणेश जी आप पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें।

गणेश प्रतिमा की साफ़ सफाई

सबसे पहले काम जो आपको करना है वो ये है की आप गणेश प्रतिमा की साफ़ सफाई अच्छे से करे। आप प्रतिमा को साफ़ करने के लिए कोई भी साफ़ कपडा ले सकते है। उसके बाद आपको मूर्ति और मंदिर से पुराने फूल और अन्य चीजे जैसे रोली, इश्तेमाल धुप को साफ़ करना है। कहा जाता है की पुरषो को आरती पढ़ते वक्त धोती कुर्ता पहनना चाहिए वही महिलाओ को साडी या सलवार कमीज़ पहनना चाहिए। इसके बाद आप अगरबत्ती को रोशन कर सकते हैं, ताकि अगरबत्ती की सुगंध से प्रार्थना के वातावरण मे खुसबू घुल जाए । इसके बाद आपको गणेश मूर्ति के माथे पर चंदन या रोली का तिलक लगाना चाहिए। मूर्ति के चारों ओर फूल लगाएं और दूर्वा (भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली एक विशेष प्रकार की हरी घास) अर्पित करें। मूर्ति के सामने मोदक की थाली (भगवान गणेश की सबसे प्रिय मिठाई या लड्डू) या अन्य कोई भी मिठाई रखें।

गणेश आरती शुरू

जब आपके सभी परिवार के सदस्य एक साथ इकट्ठा हो जाएं तो गणपति बप्पा मोरया का गणेश नारा कहकर आरती शुरू करें। अब अपने दाहिने हाथ में आरती की थाली और अपने बाएं हाथ में घंटी को पकड़ें। गणेश आरती को एक साथ गाना शुरू करें और आप आरती थाली को मूर्ति के सामने दक्षिणावर्त दिशा में घुमाना शुरू कर सकते हैं और घंटी को हिला सकते हैं। नोट: हिंदू पौराणिक कथाओं में भक्तों की प्रार्थना के बारे में उन्हें नोटिस या सतर्क करने के लिए भगवान के सामने एक घंटी बजाई जाती है।


श्री गणेश चालीसा हिंदी मे  | Ganesh Chalisa in Hindi | Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi

श्री गणेश चालीसा
॥दोहा॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
॥चौपाई॥
जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभः काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे। मुषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै। पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥

 

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो। उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी। सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा। शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

॥दोहा॥
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥

टिप्पणियाँ