नवरात्रि के 9 दिन का भोग 

नवरात्रि दिन 1– प्रतिपदा मां शैलपुत्री (Shailputri Mata)

नवरात्रि दिन 2– द्वितीय   मां ब्रह्मचारिणी(Brahmacharini Mata)

नवरात्रि दिन 3– तृतीया  मां चंद्रघंटा(Chandraghanta Mata)

नवरात्रि दिन 4– चतुर्थी  मां कुष्मांडा(Kushmanda Mata)

नवरात्रि दिन 5– पंचमी  मां स्कंदमाता(Skanda Mata)

नवरात्रि दिन 6– षष्ठी मां कात्यायनी (Kalyani Mata)

नवरात्रि दिन 7– सप्तमी  मां कालरात्रि(Kalratri Mata)

नवरात्रि दिन 8– अष्टमी  मां महागौरी  (अष्टमी पूजा)(Mahagauri Mata)

नवरात्रि दिन 9– नवमी  मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)(Siddhidatri Mata)

नवरात्रि दिन 10– दशमी नवरात्रि पारण 





माता शैलपुत्री(Shailputri Mata)- नवरात्रि का प्रथम दिन

शैलपुत्री माता(Shailputri Mata) को क्या भोग लगता है?

ऐसा कहा गया है की माँ को भोग में गाय के दूध से बने घी से बनाए गए भोग चढ़ाने से रोगों से मुक्ति मिलती है

Shailputri Mata का मंत्र क्या है?

 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम: ह्रीं शिवायै नम:. वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌

Shailputri माता की आरती:

शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी। पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।

माता ब्रह्मचारिणी(Brahmacharini)- नवरात्रि का द्वितीय दिन

Brahmacharini Mata का मंत्र क्या है?

या देवी सर्वभू‍तेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

Brahmacharini माता को कौन सा भोग लगता है?

माता को शकर से बने चीज़ो का भोग लगाये और ऐसा कहा गया है कि इससे आयु में वृद्धि होती है

Brahmacharini की आरती

 जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो ​तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।

माता Chandraghanta - नवरात्रि का तृतीया दिन

मां Chandraghanta का भोग

माता को दूध से बनी चीजों का भोग लगता है

मां Chandraghanta के मंत्र:

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

Chandraghanta की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।

पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली।

मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।

हर संकट मे बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये।

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।

सन्मुख घी की ज्योति जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता।

पूर्ण आस करो जगदाता।

कांचीपुर स्थान तुम्हारा।

करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटूं महारानी।

भक्त की रक्षा करो भवानी।



माता Kushmanda - नवरात्रि का चतुर्थी दिन

माँ Kushmanda का मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां Kushmanda की आरती:

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

माता Skanda - नवरात्रि का पंचमी दिन

माँ Skanda Mata मंत्र:

स्कंदमाता कार्तिकेय की माता हैं। स्कंदमाता का मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Skanda Mata का भोग:

केले का भोग लगाएं या इसे दान में दे इससे माता प्रसन होती है और आपके दिमाग में वृद्धि आती है|

Skanda Mata की आरती:

जय तेरी हो स्कंदमाता।

पांचवां नाम तुम्हारा आता।

सबके मन की जानन हारी।

जग जननी सब की महतारी।

तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं।

हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।

कई नामों से तुझे पुकारा।

मुझे एक है तेरा सहारा।

कहीं पहाड़ों पर है डेरा।

कई शहरो में तेरा बसेरा।

हर मंदिर में तेरे नजारे।

गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।

शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।

इंद्र आदि देवता मिल सारे।

करे पुकार तुम्हारे द्वारे।

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।

तुम ही खंडा हाथ उठाए।

दास को सदा बचाने आई।

चमन की आस पुराने आई।

माता Kalyani - नवरात्रि का षष्ठी दिन

Kalyani Mataमंत्र:

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥ माता को इस मंत्र से भी प्रसन्न किया जा सकता है- ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥ 

मां Kalyani को क्या भोग लगाएं?

माता को सेहद का भोग लगाना चाहिए क्यूंकि सेहद से बने सिज़ो से वो प्रसन हो जाती है

Kalyani माता की आरती:

जय जय अंबे जय कात्यायनी ।
जय जगमाता जग की महारानी ।।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा ।।
कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की ।।

झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपानेवाली।।

बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।।

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

माता Kalratri - नवरात्रि का सप्तमी दिन

Kalratri मंत्र:

'ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:। ' एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

माता Kalratri को क्या भोग लगाएं?

माता को गुड़ के बने लडू का भोग लगाये

Kalratri माता की आरती:

कलरात्रि जय जय महाकाली
काल के मुंह से बचाने वाली
दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा
महा चंडी तेरा अवतारा
पृथ्वी और आकाश पर सारा
महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली
दुष्टों का लहू चखने वाली
कलकत्ता स्थान तुम्हारा
सब जगह देखूं तेरा नजारा
सभी देवता सब नर नारी
गावे स्तुति सभी तुम्हारी
रक्तदंता और अन्नपूर्णा
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी
ना कोई गम ना संकट भारी
उस पर कभी कष्ट ना आवे
महाकाली मां जिसे बचावे
तू भी 'भक्त' प्रेम से कह
कालरात्रि मां तेरी जय

माता Mahagauri - नवरात्रि का अष्टमी  दिन

माँ Mahagauri मंत्र:

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।। 2- या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ Mahagauri की आरती:

जया उमा भवानी जय महामाया।।

हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।

चंद्रकली और ममता अंबे।

जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।

भीमा देवी विमला माता।

कौशिकी देवी जग विख्याता।।

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।

सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।

तभी मां ने महागौरी नाम पाया।

शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।

मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।

महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।

Mahagauri का भोग:

माता को नारीरिअल के बने चीज़ो का भोग लगाया जाता है

माता Siddhidatri - नवरात्रि का नवमी दिन

Siddhidatri माता का मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

Siddhidatri माता की आरती

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।

तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।

तू सब काज उसके करती है पूरे।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।

जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।


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